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अब टोल प्लाजा पर नहीं रुकेंगी गाड़ियां! FASTag के बाद MLFF सिस्टम की तैयारी, बिना बैरियर सीधे गुजरेंगे वाहन

नई दिल्ली,12 सितंबर। भारत में टोल प्लाजा पर वाहनों को रोककर टोल वसूली करने की व्यवस्था जल्द ही बीते दौर की बात हो सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि सरकार टोल व्यवस्था को और तेज, सुविधाजनक और डिजिटल बनाने के लिए मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और वे बिना बैरियर के अपनी लेन से सीधे गुजर सकेंगे।

सरकार इस नई टोल व्यवस्था को शुरू करने की तैयारी कर रही है। MLFF सिस्टम को FASTag के बाद टोल कलेक्शन व्यवस्था में अगला बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और वाहनों के इंतजार को पूरी तरह खत्म करना है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में डिजिटल टोल व्यवस्था को लेकर सरकार की तैयारियों और FASTag के प्रभाव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि FASTag लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और इंतजार करने का समय काफी कम हुआ है। पहले कई टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को करीब 12 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, जबकि कुछ परिस्थितियों में यह समय 30 मिनट तक पहुंच जाता था। FASTag के इस्तेमाल से इस इंतजार में करीब 80 से 90 प्रतिशत तक कमी आई है।

अब सरकार का लक्ष्य बचा हुआ इंतजार भी खत्म करना है। इसी दिशा में मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोल सिस्टम को लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस तकनीक में टोल प्लाजा पर पारंपरिक बैरियर और टोल बूथ की आवश्यकता काफी हद तक खत्म हो जाएगी। वाहन बिना रुके टोल पॉइंट से गुजर सकेंगे और टोल की राशि डिजिटल माध्यम से संबंधित वाहन से वसूली जाएगी।

MLFF सिस्टम में वाहनों की आवाजाही को आधुनिक तकनीक के माध्यम से रिकॉर्ड और ट्रैक किया जाएगा। वाहन चालक को टोल भुगतान के लिए लाइन में लगने या बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इससे हाईवे पर यातायात का प्रवाह लगातार बना रहेगा और टोल प्लाजा के आसपास लगने वाले जाम से भी राहत मिल सकती है।

इस नई व्यवस्था से केवल वाहन चालकों का समय ही नहीं बचेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है। टोल प्लाजा पर लंबे समय तक वाहनों के खड़े रहने से ईंधन की अनावश्यक खपत होती है। MLFF सिस्टम के जरिए वाहनों को लगातार गति से आगे बढ़ने की सुविधा मिलने पर इस समस्या को कम किया जा सकता है।

नितिन गडकरी के अनुसार, FASTag के कारण देश में हर साल करीब 71 करोड़ घंटे की बचत हो रही है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 68,500 करोड़ रुपये का फायदा होने का अनुमान है। टोल प्लाजा पर कम समय रुकने से ईंधन की बचत के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आई है। उन्होंने इसके पर्यावरणीय लाभ की तुलना करीब 2.7 करोड़ पेड़ लगाने से होने वाले फायदे से की।

सरकार टोल भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और आसान बनाने पर भी जोर दे रही है। केंद्रीय मंत्री ने सभी बैंकों को FASTag व्यवस्था से जुड़ने की जरूरत बताई है, ताकि देशभर में डिजिटल टोल भुगतान की सुविधा और बेहतर हो सके। उनका जोर टोल कलेक्शन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर है।

गडकरी ने पुराने समय की टोल व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले कई बार टोल पर छोटे पैसे वापस करने की समस्या होती थी। ऐसे मामलों में वाहन चालकों को छुट्टे पैसे के बदले चॉकलेट तक दे दी जाती थी। डिजिटल भुगतान और FASTag के विस्तार के बाद इस तरह की परेशानियां काफी कम हुई हैं।

FASTag ने देश की टोल व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है और अब MLFF सिस्टम को उससे भी आगे की तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह व्यवस्था तय योजना के अनुसार लागू होती है तो आने वाले समय में हाईवे पर टोल प्लाजा पार करना पहले की तुलना में काफी तेज और आसान हो सकता है। वाहनों को रुकने की जरूरत नहीं होगी, टोल भुगतान डिजिटल तरीके से होगा और ट्रैफिक का प्रवाह भी लगातार बना रहेगा। इससे यात्रियों का समय बचने के साथ हाईवे पर सफर अधिक सुविधाजनक और सुगम होने की उम्मीद है।

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