कोरबा, 25 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच प्रेम, संवेदना और सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल सामने आई है। करतला क्षेत्र के सजापानी सहित आसपास के सात गांवों के ग्रामीणों ने आज हाथियों के झुंड में जन्मे एक नन्हे शावक के स्वागत में खुशियां मनाईं। ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार हाथी के बच्चे की छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा। इस अनोखे आयोजन में भजन-कीर्तन के साथ ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मानव-हाथी संघर्ष के बीच ग्रामीणों की यह पहल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति प्रेम का सकारात्मक संदेश दे रही है।
कोरबा जिले के करतला वन क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीणों की वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया। आमतौर पर हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीण क्षेत्रों में भय और चिंता का माहौल रहता है, लेकिन सजापानी सहित सात गांवों के लोगों ने हाथी के नवजात शावक के जन्म को उत्सव के रूप में मनाकर अलग उदाहरण प्रस्तुत किया।
ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से छठी का आयोजन किया। भजन-कीर्तन और उत्सव के माहौल में नन्हे हाथी का नामकरण किया गया। इस अवसर पर वनमंडल के एसडीओ मणिकांत वर्मा भी उपस्थित रहे। वन विभाग ने ग्रामीणों की इस पहल को मानव-हाथी संघर्ष के बीच सकारात्मक सोच विकसित करने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कदम माना है।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही लंबे समय से ग्रामीणों के लिए चुनौती बनी हुई है। हाथियों के झुंड कई बार खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा मकानों को क्षति पहुंचने और मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे हालात में ग्रामीणों द्वारा हाथी के बच्चे के जन्म पर खुशियां मनाना इंसान और वन्यजीवों के बीच बदलती सोच का उदाहरण माना जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण है। जंगल और वन्यजीव प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। हाथियों के प्रति ग्रामीणों की यह संवेदनशीलता दर्शाती है कि वन्यजीवों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व की भावना को सामाजिक भागीदारी से मजबूत किया जा सकता है।
हालांकि वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती अभी भी गंभीर बनी हुई है। इसके समाधान के लिए वन विभाग की सतर्क निगरानी, हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी, ग्रामीणों की सुरक्षा, जागरूकता अभियान और नुकसान की स्थिति में त्वरित सहायता जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है। इसके साथ ही हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना भी आवश्यक है।
करतला क्षेत्र के सात गांवों के ग्रामीणों ने नन्हे हाथी ‘काशी’ की छठी मनाकर यह संदेश दिया है कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति सम्मान केवल जागरूकता अभियानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। ग्रामीणों की इस पहल को वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।






