कोरबा, 22 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मातृत्व लाभ को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारी भी मातृत्व अवकाश और उससे जुड़े वित्तीय लाभों की हकदार हैं। केवल संविदा अवधि समाप्त होने या नियमित नियुक्ति होने के आधार पर किसी महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कोरबा के शासकीय मेडिकल कॉलेज में कार्यरत संविदा महिला डॉक्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही, संबंधित डॉक्टर को 180 दिनों का मातृत्व अवकाश और कानून के तहत देय अन्य लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया।
मामला कोरबा स्थित बिसाहूदास महंत मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में संविदा सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत डॉ. निकिता श्रीवास्तव से संबंधित है। उनकी नियुक्ति 16 नवंबर 2022 को हुई थी। नौकरी के दौरान गर्भवती होने पर उन्होंने मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत 31 जुलाई 2026 को आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने 1 अगस्त 2026 से 28 जनवरी 2027 तक 180 दिनों के सवेतन मातृत्व अवकाश की मांग की थी। विभागाध्यक्ष ने 3 अगस्त 2026 को आवेदन अनुमोदन के लिए कॉलेज के डीन के पास भेज दिया था।
हालांकि, मातृत्व अवकाश स्वीकृत करने के बजाय कॉलेज प्रशासन ने 6 अगस्त 2026 को डॉ. निकिता को एक महीने का बर्खास्तगी नोटिस जारी कर दिया। प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि संबंधित पद पर नियमित चिकित्सक डॉ. शीला वर्मा की नियुक्ति 25 जून 2026 को हो चुकी थी, इसलिए संविदा सेवा समाप्त मानी जानी चाहिए।
इस आदेश को चुनौती देते हुए डॉ. निकिता ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के डॉ. कविता यादव विरुद्ध सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया। इस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि मातृत्व लाभ का अधिकार संविदा की अवधि समाप्त होने के बाद भी प्रभावी रह सकता है।
डिवीजन बेंच ने पाया कि नियमित चिकित्सक की नियुक्ति के बाद भी कॉलेज प्रशासन ने डॉ. निकिता को सेवा में जारी रखा था। मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन करते समय वह कार्यरत थीं। ऐसे में उन्हें मातृत्व लाभ से वंचित करना उचित नहीं था।
हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2026 के सिंगल बेंच के फैसले और 6 अगस्त 2026 के बर्खास्तगी नोटिस को निरस्त करते हुए डॉ. निकिता को आवेदन की तारीख से 180 दिनों का मातृत्व अवकाश देने तथा अधिनियम के तहत देय सभी वित्तीय और अन्य मातृत्व लाभ प्रदान करने का आदेश दिया। इस फैसले को संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







