नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की अपील के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में 6,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों, बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा उपायों के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कंपनियों को भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात करने की योजना बनाई गई है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीएपीएफ की कुल 220 कंपनियों में से प्रत्येक शिफ्ट में 30 कंपनियां तैनात रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिन में तीन शिफ्ट निर्धारित की गई हैं। नई दिल्ली, आसपास के जिलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर जवानों की तैनाती की जाएगी। यदि रात के समय भीड़ बढ़ती है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की आवश्यकता पड़ती है, तो एक शिफ्ट में तैनात कंपनियों की संख्या बढ़ाकर 60 की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में अभिजीत दीपके की ओर से 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की अपील है। 15 अक्टूबर को दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दीपके ने कहा था कि दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन वह इससे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश में तिरंगा फहराने के लिए जेल जाना पड़े, तो वह इसके लिए भी तैयार हैं।
दीपके ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर को सीजेपी की ओर से दिल्ली बंद का आह्वान किए जाने के बाद पुलिस ने बसों और मेट्रो सेवाओं पर रोक लगाई, कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं। उन्होंने दावा किया कि 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने के उनके ऐलान के बाद पार्क को बंद कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में तिरंगा फहराना अपराध हो गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
मामले की पृष्ठभूमि में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी भी शामिल है। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, उन पर शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और जंतर-मंतर में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप लगाए गए। इसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया।
दोनों की गिरफ्तारी के बाद दीपके ने अधिक से अधिक लोगों से 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एकत्र होकर तिरंगा फहराने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी के सदस्यों को तिरंगा फहराने के कारण जेल भेजा गया है।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से संबंधित क्षेत्र से दूर रहने की अपील की है और निषेधाज्ञा का हवाला दिया है। वहीं, यातायात पुलिस ने भी कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। सेंट्रल पार्क और कनॉट प्लेस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण तथा भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकना है।







