बिलासपुर, 25 सितम्बर। शरिया कोर्ट से तलाक के फरमान पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा है कि देश में इस तरह के ‘इस्लामिक कोर्ट’ (दारुल कजा) के गठन का कानून में कोई प्रावधान नहीं है। अब मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।
बिलासपुर निवासी उज्मा बानो पति रजा रहमान ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। उनका पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया गया कि इदारा ए-शरिया दारुल कजा की मुहर और आदेश के आधार पर उन्हें दूसरा तलाक दिया गया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें इस तरह के मामलों में रोक लगाई गई है।
हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने यह भी तय किया कि जब तक पति वैधानिक रूप से तलाक साबित नहीं करता, तब तक दंपती वैध रूप से विवाहित माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत किसी ‘इस्लामिक कोर्ट’ को इस प्रकार की कार्यवाही करने या तलाक देने का अधिकार नहीं है।







