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आयुर्वेद सेवा सम्मेलन में विधायक अनुज शर्मा और पत्नी ने लिया मरणोपरांत अंगदान का संकल्प, CM साय बोले- अंगदान से बड़ा कोई महादान नहीं

रायपुर, 23 सितम्बर। राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में आयोजित राज्यस्तरीय ‘आयुर्वेद सेवा सम्मेलन’ में मानव सेवा और सामाजिक सरोकार से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल सामने आई। सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की मौजूदगी में धरसींवा विधायक अनुज शर्मा और उनकी धर्मपत्नी ने मरणोपरांत अंगदान करने का संकल्प लिया। विधायक दंपति की इस पहल की कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और लोगों ने सराहना की।

सम्मेलन में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, टंक राम वर्मा, विधायक प्रबोध मिंज सहित प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, समाजसेवी और आम नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले चिकित्सकों, मरणोपरांत अंगदान का संकल्प लेने वाले दानदाताओं और नियमित रक्तदान के माध्यम से लोगों का जीवन बचाने वाले सेवाभावियों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधायक अनुज शर्मा और उनकी धर्मपत्नी को अंगदान का संकल्प लेने पर बधाई देते हुए कहा कि अंगदान से बड़ा कोई महादान नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक दंपति की यह पहल समाज में सेवा और मानव कल्याण की भावना को मजबूत करने के साथ युवाओं को भी प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में आयुर्वेद के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। यह केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की दिशा भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आयुर्वेद के साथ आधुनिक चिकित्सा पद्धति को भी मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

मरणोपरांत अंगदान का संकल्प लेने के बाद विधायक अनुज शर्मा ने मीडिया से चर्चा में इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय और पवित्र दिन बताया। उन्होंने कहा कि अंगदान केवल एक घोषणा नहीं है, बल्कि ईश्वर द्वारा दिए गए मानव शरीर को समाज को लौटाने का विनम्र उपहार है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने में काम आए, इससे बड़ा मानव धर्म क्या हो सकता है।

विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि भारतीय परंपरा में महर्षि दधीचि ने समाज की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों का दान किया था। उनके अनुसार, अंगदान का संकल्प उसी सेवा भावना से प्रेरित होकर उठाया गया एक छोटा सा प्रयास है। उन्होंने लोगों से जीते जी समाज के लिए योगदान देने के साथ ही मरणोपरांत भी किसी जरूरतमंद के जीवन का आधार बनने की दिशा में अंगदान का संकल्प लेने की अपील की।

सम्मेलन में वक्ताओं ने आयुर्वेद की उपयोगिता, जनस्वास्थ्य में इसकी भूमिका और अंगदान के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में अंगदान और रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए अधिक से अधिक लोगों को इस दिशा में आगे आने का संदेश दिया गया।

आयुर्वेद सेवा सम्मेलन में विधायक दंपति द्वारा लिया गया मरणोपरांत अंगदान का संकल्प कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। आयोजकों और उपस्थित लोगों ने इसे समाज में मानव सेवा, परोपकार और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली पहल बताया।

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